Friday, 7 August 2020

मेरा परिचय और भी है

"आत्मदीप"

लघु काल-चिन्तन ५६

"मेरा परिचय और भी है"

मैं कौन हूँ, 
मेरा नाम तो परिचय है ही मेरा 
पर कुछ और भी पहचाने हैं मेरी
मैं चाक चढ़ी मिट्टी हूँ
मैं घाटी में लुढ़का पत्थर हूँ
आँगन का मैं उपवन हूँ
मैं सफेद सी वह चादर हूँ
मैं तुलसी का वह बिरवा हूँ 

पर मैं वह अवधू शिल्प हूँ..
मैं गर मिट्टी हूँ तो 
...वह दादी थी मेरी कुम्हार, 
मैं गर पत्थर हूँ तो 
...माँ मेरी शिल्पकार,
मैं वह उपवन हूँ मुझे तो 
...पिता ने माली बन पाला है
मैं वह दीन हीन था 
...इस समाज ने गोदी में बैठाला है
मेरे अंतस में 
..दिन-रात खड़ा है वह सद्गुरू
मैं गर आँगन में तुलसी बिरवा हूँ
...मीठे रिश्तों की धूप में नहाया हूँ
मैं एक बहती नदी में हूँ
...""प्रेम" है वह अजस्र धार 
  जिसमें आह्लादित हूँ

आओ! तुम भी अवगाहन कर लो!!

रामनारायण सोनी

No comments:

Post a Comment

श्री

अनुक्रम    1 अयं आत्मा ब्रह्म  2 विक्षिप्त अथवा मुक्त  3 अद्वैताभास 4 शब्द ब्रह्म 5 जड़ में चेतन और चेतना का दर्शन 6 "समस्त ...