Thursday, 4 February 2021

विश्लेषण और संश्लेषण

आत्मदीप

लघु काल-चिन्तन ८९

"विश्लेषण और संश्लेषण"

मैने एक सरोवर देखा, विपुल जलराशि देखी, सरोवर के जल में तैरती बतखें देखी, जल की सतह पर खिले हुए कमल देखे, किनारे पर खड़े अमलतास के पेड़ से झरते फूलों से जल पर बनी रंगोली देखी और उनकी गिनती करने में लग गया। उनकी जातियाँ, प्रजातियाँ, प्रकारान्तर, और गहन अध्ययन में लग गया। जो भी मुझे उपलब्ध हुआ वह कम नहीं था। वह मेरी पुरानी जानकारी में अभिवृद्धि थी और कुछ नया-नया भी जुड़ गया था लेकिन दर्शन की भाषा में यह एक विश्लेषण था, एनालिसिस था। व्यर्थ नहीं था एक विश्लेषक की दृष्टि में पर्याप्त था। अभी इसका सिन्थेसिस होना शेष है। जब इसका सिन्थेसिस होगा तो सरोवर, उसका जल एक रंगमंच हो जावेगा, कमल में सुगन्ध आने लगेगी, बतखें केलि करती दिखाई देगी उसके तैरने से जल पर उठी लहरें डैनों की तरह फैल जाएँगी, प्रकृति अपने हाथों जलरंगोलियाँ बनाती नजर आवेंगी। यह उपादान प्रकृति और परमात्मा की अनुपम कृति का संस्लेषण है सिन्थेसिस है। महसूस करें हम।

रामनारायण सोनी
०४.०२.२१

No comments:

Post a Comment

श्री

अनुक्रम    1 अयं आत्मा ब्रह्म  2 विक्षिप्त अथवा मुक्त  3 अद्वैताभास 4 शब्द ब्रह्म 5 जड़ में चेतन और चेतना का दर्शन 6 "समस्त ...