Tuesday, 2 March 2021

समर्पण और कृतित्व

आत्मदीप

लघु काल-चिन्तन १०७

"समर्पण और कृतित्व"

एक एक छोटी सी बात से बड़े लोग जीवन कमा लेते हैं। वे लोग कमाल के होते हैं।
कुछ लोग जीवन खपा देते हैं बाकी कुछ लोग जीवन लगा देते हैं लेकिन कुछ थोड़े लोग ऐसे भी होते हैं कि वे जीवन कमा लेते हैं। आलसी लोगों का प्रमाद में ही जीवन पूरा खप जाता है। उन्हें यह पता नहीं हो पाता है कि कब सुबह हुई कब शाम? कब मौसम आये कब चले गये? पर वे निठल्ले ही बैठे या पड़े रहे। मिट्टी से आये और मिट्टी में मिल गये। उनकी यात्रा मिट्टी से मिट्टी की ही होती है। जीवन में गिनाने लायक कुछ नहीं होता है। दूसरे वे लोग हैं जो जीवन को खर्च की तरह नहीं बल्कि इन्वेस्टमेंट की तरह लेते हैं। ऐसे लोगों की दुनिया में बहुतायत है। मेनेजमेन्ट में इन्हें वर्क-हॉर्स की संज्ञा दी है। ये समय और श्रम का समन्वय कर के जीवन का सुगम रखना चाहते हैं। तीसरे वे लोग हैं जो समय, श्रम, संवेदना, महत्वाकांक्षा का समांगी मिश्रण तैयार करते हैं और एक्स्ट्रा आर्डिनरी काम कर दिखाते हैं। इनका काम करने का अपना ढंग होता है, उसमें पूरी तरह ध्यान केन्द्रित करते हैं, अपना संपूर्ण लगा कर कार्य संपादन करते हैं। वे अपने प्रतिमान स्वयं गढ़ते हैं और उन्हें समय समय पर परिशोधन करते ही रहते हैं। जैसे तेंदुलकर का जीवन भर का शार्प पॉइन्ट केवल बॉल को हिट करना, पिकासो का कैनवास पर कलम चलाना, तेनसिंह का पहाड़ चढ़ना, एडिसन का बल्ब बनाना, आइन्सटीन का रिलेटिविटी पर काम करना रहा है। वे अपनी छोटी सी लकीर पर जीवन भर काम करते रहे और सर्वश्रेष्ठ हो गये। वे लोग मानते हैं कि मुर्गे के बाँग देने पर सूरज नहीं उगेगा बल्कि सूरज उगने पर मुर्गा बाँग देगा। वे कार्य नहीं कारण बनने का माद्दा रखते हैं।  
उपनिषद् कहता है..
अथो खल्वाहुः काममय एवायं पुरुष इति स यथाकामो भवति तत्क्रतुर्भवति यत्क्रतुर्भवति तत्कर्म कुरुते यत्कर्म कुरुते तदभिसंपद्यते॥
आप अपनी अन्तरतम गहराइयों में जो कामना करते हैं आप वैसे ही हो जाते हैं, आप जैसे हो जाते हैं वैसे ही कर्म करते हैं, आप जैसे कर्म करते हैं आपकी उपलब्धियाँ वैसी ही होंगी। 
इसलिये अपनी इच्छाएँ डीप रूटेड हों और फिर समर्पित भाव तथा पूर्ण तीव्रता से कार्य करने में लग जावें फिर देखिये कि उपलब्धियाँ स्वमेव महान होगी। 

रामनारायण सोनी
३.३.२१

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