आत्मदीप
लघु काल-चिन्तन ८५
"जीवन एक कहानी है"
एक था राजा, एक थी रानी दोनों मर गये खतम कहानी। यह दादी के मूड की कहानी है। बच्चे जब एक और कहानी सुनाने को कहते हैं तो दादी की यह वाइन्डअप अथवा पैकअप वाली कहानी होती है। कहानी अतीत के दस्तावेज होते हैं। कभी कभी किसी बड़ी कहानी में कई छोटी छोटी कहानियाँ शामिल होती है, कई दृष्टान्त होते है, कई क्षेपक होते हैं। जैसे रामचरितमानस के मुख्य केन्द्र में राम के आदर्श की कहानी है लेकिन उसमें कई छोटी छोटी कहानियाँ है जैसे केवट प्रसंग, सुग्रीव मिलन, विभीषण की शरणागति, मारीच, सुबाहू, ताड़का, लंकिनी आदि आदि की उनकी अपनी अपनी जीवन गाथा के छोटे बड़े रूप में शामिल है। अगर ये सब इसमें शामिल न होते तो अन्य राजाओँ की तरह यह कहानी दादी माँ की आखिरी कहानी जैसी ही होती।
हमारा जीवन भी ऐसे अनगिनत छोटी छोटी कथाओं का एक संग्रह है। जीवन के विभिन्न पड़ावों पर लोग मिलते गए फिर वक्त के मोड़ आते गये लोग बिछुड़ते गये। हर एक के साथ कोई न कोई कथानक जुड़ा। इन सारे कथानकों को जोड़े बिना क्या अपने जीवन की कहानी पूरी हो सकती है? ये अध्याय हमने ही जोड़े हैं हालाँकि कुछ संयोग से जुड़े, कुछ हमारे प्रयास से जुड़े, कुछ अनचाहे जुड़े। जो भी हो, जैसा भी हो जीवन इसी समग्रता का कन्सोलिडेटेड पैकट है। अनफोल्ड करें तो दिखेगा हम क्या से क्या हो गए। इनमें से कुछ अध्याय इग्नोर तो कर सकते हैं पर डिलिट नहीं।
एक बात तो थोड़ी थोड़ी समझ में आती है कि अकर्मण्यता, निष्क्रियता, प्रमाद, अवसाद, निठल्लापन जीवन को दादी माँ की आखिरी कहानी की तरह छोटा कर देते हैं। अपनी कहानी में कोई अध्याय आज से और लिखा जाए तो एक और सार्थकता जोड़ सकेंगे।
"तो उठा लो आज नई कलम, चलो कुछ अच्छा सा लिखते हैं।"
रामनारायण सोनी
०२.०२.२१
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