Wednesday, 24 February 2021

अवचेतन में अच्छे स्वप्न भरें

आत्मदीप

लघु काल-चिन्तन १०४

"अवचेतन में अच्छे स्वप्न भरें"

हमारा चेतन मन जगत से जुड़ा है लेकिन नेपथ्य में कार्य कर रहे अवचेतन को यही प्रोग्राम करता है। हमें कार चलाना सीखना है तो कोच हमें सिखाता है स्टीयरिंग, क्लच, एक्लरेटर, ब्रेक, गीयर आदि का प्रयोग कब कब किस किस तरह करना है? यह सब सीखने का कार्य चेतन मन का है। फिर इस पूरे प्रोग्राम का लोडिंग अवचेतन में हो जाता है तो ड्राइव करने वाला गाने भी सुनता है, साथ बैठे व्यक्ति से बात भी करता है साथ ही वह गाड़ी भी पूरी कुशलता से चलाता रहता है। अवचेतन का सम्पूर्ण प्रोग्रामिंग चेतन मन ही करता है। दूसरे शब्दों में कहें तो हम गम्भीरता से अपने मन में जो विचार करते हैं वह अवचेतन को प्रोग्राम करता ही रहता है और हमें पता तक नहीं चलता। हमने नकारात्मक सोच बनाई तो अवचेतन में वही प्रोग्रामिंग हो गया और सकारात्मक सोच बनाई तो ऐसा ही अवचेतन मोल्ड हो जावेगा। हम अपने अपने कल्पवृक्ष के तले बैठे हैं। ऐसा तुरत-फुरत सम्भव नहीं है पर धीरे धीर सतत चलने वाली प्रकिया यही है। सोये सोये देखे जाने वाले सपनों की हम यहाँ बात भी नहीं कर रहे हैं। जागते हुए देखे गए सपने आपके भविष्य के निर्माता हैं। ये सपने अवचेतन में अगर ठीक से बैठ गए और इनका प्रोग्रामिंग फुल इन्टेन्सिटी से हो गया तो ये सपने आपको सोने नहीं देंगे। जरूरी नहीं कि वे पूरी तरह या आंशिक रूप में साकार हों। यह बात भी तय शुदा है कि बिना सपने के कोई भी आकार पाना असम्भव है।
साइकिल रिपेयरिंग करने वाले राइटबन्धुओं ने अपने अवचेतन को रोज प्रोग्राम किया कि उन्हें उड़ने वाली मशीन बनानी है भले ही उन्होंने एरोनॉटिक्स इन्जीनियरिंग नहीं पढ़ी हो। आखिर एक दिन उन्होंने यह करिश्मा कर दिखाया। हमारे पूर्व राष्ट्रपति, मिसाइल मेन अब्दुल कलाम ने बड़े-बड़े स्वप्न देखे और एक दिन वे साकार हो कर जमीनी धरातल पर साकार हो कर उतर आये।
"चलो कुछ अच्छा हो जाए !"

रामनारायण सोनी
२४.०२.२१


https://youtu.be/w22yb4hfmDI?t=379

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